हार्ट पल्पिटेशन के लक्षण, कारण, इलाज, दवा

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हार्ट पल्पिटेशन का इलाज – Coronary heart Palpitations Remedy in Hindi

कभी-कभार पल्पिटेशन होना और कुछ सेकंड तक रहना सामान्य होता है, लेकिन अगर बार-बार और लंबे समय तक हार्ट पल्पिटेशन के लक्षण महसूस होते हैं, तो इस स्थिति में हृदय की जांच करवाने की सलाह दी जाती है. वैसे हार्ट पल्पिटेशन को इलाज की जरूरत नहीं होती है, जब तक कि ये किसी गंभीर बीमारी के कारण न हो. हार्ट पल्पिटेशन का इलाज इसके कारणों के आधार पर निम्न प्रकार से किया जा सकता है –

हृदय रोग का इलाज

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अगर किसी तरह का हृदय रोग है और इसकी वजह से हार्ट पल्पिटेशन हो रहा है, तो आपको इस बीमारी का इलाज करवाने की जरूरत होती है. हृदय रोग के इलाज के बाद पल्पिटेशन के लक्षणों से भी छुटकारा मिल सकता है.

इसके अलावा अगर किसी अन्य मेडिकल कंडीशन की वजह से पल्पिटेशन की समस्या हो रही है, तो उसका इलाज करवाना जरूरी होता है. इस तरह से आप हार्ट पल्पिटेशन के लक्षणों को कम कर सकते हैं.

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तनाव कम करें

तनाव, चिंता या अवसाद भी हार्ट पल्पिटेशन का कारण बनता है. ऐसे में आप तनाव को कम करके इसका इलाज कर सकते हैं. तनाव को कम करने हृदय की बढ़ी हुई धड़कनों को कम करने में मदद मिल सकती है. तनाव कम करने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन जरूर करें. इसके अलावा, रिलेक्सेशन थेरेपी का भी सहारा लिया जा सकता है.

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कैफीन व नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं

अगर कोई कैफीन और नशीले पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करता है, तो इससे हार्ट पल्पिटेशन हो सकता है. ऐसे में कैफीन और नशीले पदार्थों का सेवन कम से कम करें. जिन दवाइयों या उत्पादों में कैफीन या निकोटीन होता है, उन्हें भी खाने से बचना चाहिए.

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हेल्दी डाइट

ब्लड शुगर लेवल के कम होने पर दिल की धड़कनें बढ़ सकती हैं. ऐसे में ब्लड शुगर को सामान्य करने के लिए शुगर और हेल्दी कार्ब्स को अपनी डाइट में शामिल करें. इससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ेगा और हार्ट पल्पिटेशन से बचाव होगा. इसके लिए ताजे फलों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए.

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दवाइयों को बदलें

अगर किसी को लगता है कि जो दवाइयां वो ले रहे हैं, उसकी वजह से हार्ट पल्पिटेशन हो रहा है, तो उन दवाइयों को डॉक्टर की सलाह पर बदला जा सकता है. इसलिए, दवाइयों के नुकसान से बचने के लिए किसी भी दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल न लें.

(और पढ़ें – हृदय रोग के लिए उपकरण)

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