हाइपोथायरायडिज्म और बांझपन के बीच संबंध व इलाज

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हाइपोथायरायडिज्म और बांझपन के बीच संबंध

हाइपथायरायडिज्म बांझपन का कारण बन सकता है. अगर किसी महिला को हाइपोथायरायडिज्म है, तो उसके लिए गर्भधारण करना मुश्किल हो सकता है. हाइपोथायरायडिज्म से ग्रस्त महिलाओं के गर्भवती होने की संभावना काफी कम हो जाती है. इन महिलाओं को गर्भधारण करने में अधिक समय लग सकता है.

दरअसल, हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड ग्रंथि कुछ जरूरी हार्मोंस का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन नहीं कर पाती है. ऐसे में जब थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम होता है, तो अंडाशय से अंडा रिलीज नहीं हो पाता है. इस स्थिति में प्रजनन क्षमता कम हो सकती है. आसान भाषा में समझें, तो  हाइपोथायरायडिज्म वाली महिलाएं तय समय पर ओवुलेट नहीं कर पाती हैं, जबकि गर्भवती होने के लिए ओवुलेट करना जरूरी होता है. 

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इसके अलावा, जब किसी महिला को हाइपोथायरायडिज्म होता है, तो उसे कुछ ऑटोइम्यून या पिट्यूटरी डिसऑर्डर हो सकते हैं. ये बीमारियां भी प्रजनन क्षमता को कम कर सकती हैं.

हाइपोथायरायडिज्म पुरुषों की प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है. हाइपोथायरायडिज्म वाले पुरुषों में कामेच्छा कम होने लगती है. साथ ही शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है, जो कि महिला पार्टनर को गर्भवती करने के लिए जरूरी होते हैं.

हाइपोथायरायडिज्म पुरुषों और महिलाओं दोनों में थकान पैदा कर सकता है. जब कोई व्यक्ति थका हुआ महसूस करता है, तो उसे संभोग करना मुश्किल हो जाता है. जब सही और बेहतर तरीके से सेक्स नहीं कर पाता है, तो गर्भवती होना कठिन हो सकता है.

(और पढ़ें – बांझपन से छुटकारा पाने के लिए योग)



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