बालों का झड़ना रोकने के घरेलू उपाय

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दादी-नानी के जमाने से ये माना जाता है बालों में तेल से चंपी करने से बालों को फायदा पहुँचता है। लेकिन क्या तेल लगाने से सचमुच बालों का झड़ना कम होता है? क्योंकि लोग ये मानते हैं कि प्राकृतिक चीजों से बने तेल या ऑयल से चंपी करने पर न सिर्फ बालों का झड़ना कम होता है बल्कि वे काले घने और स्वस्थ भी होते हैं। साथ ही बालों की जड़े मजबूत होती है जिससे बालों का झड़ना, रूसी, बेजान होना, दोमुँहे बाल जैसी समस्याओं को कुछ हद तक नियंत्रण में किया जा सकता है।

ये तो सच है कि प्राकृतिक चीजों से बने तेल से मसाज या चंपी करने से न सिर्फ बालों को पौष्टिकता मिलती है बल्कि उससे बालों को नवजीवन भी मिलता है [1]।

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लेकिन डॉ. अनूप पुरूकायस्था, कंसल्टेंट डर्मालॉजिस्ट  का मानना है कि इससे बालों को फायदा तो पहुँचता है लेकिन बालों का झड़ना बंद हो जाता है इस बात का कोई प्रामाणिक तथ्य अभी तक सामने नहीं आया है।  चलिये अब उन तेलों के बारे में जानते हैं जिनके चंपी से बालों का झड़ना कम करने का दावा किया जाता है।

गुड़हल का तेल-

गुड़हल के तेल में विटामिन सी, विटामिन ए और मिनरल्स होते हैं, इसलिए माना जाता है कि इससे बालों को झड़ना कम होने के साथ-साथ वह काले और घने भी बनते हैं। शायद आपको पता नहीं कि बाल के उगने और झड़ने तक उसको तीन चरणों से गुजरना पड़ता है। जब बालों का विकास शुरू होता है यानि प्रथम चरण को एनाजेन , दूसरे चरण यानि विकास के दौरान के समय को कैटाजेन और आखिरी चरण यानि टेलोजेन कहते हैं। गुड़हल इन तीनों चरणों में कार्यकारी होता है।

डॉ. दीपक सोनी, आयुर्वेदाचार्य  के अनुसार गुड़हल का तेल बालों के लिए फायदेमंद होता है।  गुड़हल (हिबिस्कस) का तेल लगाने से बाल काले और घने हो जाते हैं। गुड़हल का तेल बालों को असमय सफेद होने से रोकता है। अगर आपके बाल रूखेपन के कारण टूट रहे हैं तो गुड़हल तेल का इस्तेमाल करें। इससे बालों का झड़ना कम होता है। इसे रात में सोते समय बालों में लगाएं।

बनाने की विधि

  • गुड़हल की पत्तियां या फूल लें।
  • नारियल या तिल के तेल में 5 से 10 मिनट तक उबालें।
  • उबालते समय ध्यान रखें कि पत्तियां या फूल जलने ना पाएं।
  • ठंडा होने पर छानकर  इसे एक जार रख लें।
  • फिर इस तेल को आप बालों में हफ्ते में तीन से चार बार लगायें।

इस्तेमाल करने का तरीका

गुड़हल के तेल को ठंडा करने के बाद बालों की जड़ों में उंगलियों से हल्के से मालिश करें। रात को लगाने के बाद सुबह पानी से या हर्बल शैंपू से धो लें।

प्याज का तेल-

प्याज के तेल का इस्तेमाल तो दादी-नानी के जमाने से चला आ रहा है। प्याज में सल्फर सबसे उच्च मात्रा में होता है। साथ ही साथ इसका एन्टी बैक्टिरीयल गुण और क्लीजिंग गुण बालों का झड़ना कम करने के साथ-साथ किसी भी तरह के स्किन इंफेक्शन को रोकने में मदद करता है। प्याज का तेल एलोपेशिया एरिटा कंडिशन में बहुत ही असरदार तरीके से काम करता है [3]।

डॉ. दीपक  के अनुसार प्याज का तेल नहीं बल्कि प्याज के रस या पेस्ट को किसी अन्य तेल जैसे बादाम या नारियल तेल में मिलाकर बालों में लगाने से बाल झड़ने की समस्या कम होती है।

बनाने की विधि

  • एक कटोरी नारियल तेल में एक चम्मच प्यास का पेस्ट मिलाएं।
  • इसे तब तक गर्म करें जब तक प्याज का रंग सुनहरा ना हो जाए।
  • ठंडा होने पर इसे छानकर रख लें और इसे बालों में लगाएं।
  • हफ्ते में तीन बार इसका प्रयोग करें।

इस्तेमाल करने का तरीका-

प्याज के तेल को स्कैल्प में अच्छी तरह दस-पंद्रह मिनट तक लगायें और फिर दूसरे दिन सुबह पानी से धो लें।

पिपरमिंट ऑयल

पिपरमिंट ऑयल स्कैल्प में लगाने से वहां का रक्त संचालन या ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। ये एनाजेन चरण में बालों का विकास करने में मदद करता है। ये फॉलीकल के स्वास्थ्य और बालों को सेहतमंद बनाने में सहायता करता है[4]।

आयुर्वेदाचार्य का कहना है कि पेपरमिंट तेल लगाने से बाल जड़ से मजबूत होते हैं और इस कारण बालों का झड़ना रुक जाता है साथ ही ये तेल रूसी के कारण बाल झड़ने की समस्या को भी कम करते हैं। इसके लिए आप सीधे पेपरमिंट तेल को बालों में लगा सकते हैं। इसके अलावा नारियल के तेल के साथ मिक्स करके भी इसे लगा सकते हैं।

इस्तेमाल करने का तरीका

पिंपरमिंट ऑयल को स्कैल्प में दो से चार मिनट तक मसाज करें और फिर जब स्कैल्प सारे तेल को सोख लें तो माइल्ड शैंपू से बालों को धो लें।

लैंवडर ऑयल

लैंवडर ऑयल की सबसे बड़ी खास बात ये है कि ये बालों का विकास करने और उसको बढ़ाने में बहुत मदद करता है। इसका एन्टीबैक्टिरीयल और एन्टीमाइक्रोबायल गुण स्कैल्प में किसी भी प्रकार के संक्रमण होने से बचाता है। ये केश कूप यानि हेयर फॉलिकल को हेल्दी बनाकर बालों को रेशम और काला घना बनाने में मदद करता है[5]।

डॉ. दीपक का कहना है कि लैवेंडर तेल में काफीअच्छी खुशबू होती है। यह डैंड्रफ को हटाने में मददगार है और बालों का टूटना कम करता है। लैवेंडर तेल से बालो का रूखापन भी ठीक होता है। लैवेंडर तेल को रात में सोने से पहले सिर पर लगाये और सुबह धो ले, इस तेल को हफ्ते में तीन बार प्रयोग करे।

इस्तेमाल करने का तरीका

लैंवडर ऑयल को नारियल तेल के साथ मिलाकर दस मिनट तक स्कैल्प में उंगली के पोरों से लगायें और सूखने के बाद धो लें। इसको हफ़्ते में दो से तीन बार कर सकते हैं।

सरसों का तेल

शायद ये सुनकर आपको आश्चर्य होगा कि सरसों का तेल और बालों के लिए! लेकिन ये सच है। दादी-नानी के जमाने से बालों के लिए सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ये हेयर टॉनिक जैसा काम करता है। ये बालों को काला घना बनाने में मदद करता है[6]।

इस्तेमाल करने का तरीका

सरसों के तेल को बालों के जड़ों में अच्छी तरह से चंपी करें और दूसरे दिन सुबह शैंपू से बालों को धो लें।

नारियल तेल

डॉ. दीपक का कहना है कि यह बालों के लिए सर्वोत्तम माना गया है। उलझे और बेजान बालों के लिए इससे बेहतर कोई अन्य तेल नहीं है, इसमें कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम और मैग्नीशियम होता है जो कि बालों को संपूर्ण पोषण देता है। साथ ही नारियल तेल को कपूर के साथ मिलाकर लगाने से रुसी ( डैंड्रफ) का बार-बार आना कम किया जा सकता है।  

इस्तेमाल करने का तरीका

एक कटोरी में नारियल का तेल लेकर हल्का गुनगुना करें और इसे बालों की जड़ों में लगाएं और बालों की मसाज करें। हफ्ते में तीन -चार बार इसका प्रयोग करें।

(इस लेख की समीक्षा डॉ. दीपक सोनी, आयुर्वेदाचार्य  ने की है।)

संदर्भ

1-Nayak BS, Ann CY, et al. A Research on Scalp Hair Well being and Hair Care Practices amongst Malaysian Medical College students. Int J Trichology. 2017 Apr-Jun;9(2):58-62.

2-Adhirajan N, Ravi Kumar T,et al  In vivo and in vitro analysis of hair progress potential of Hibiscus rosa-sinensis Linn. J Ethnopharmacol. 2003 Oct;88(2-3):235-9. PubMed PMID: 12963149.

3-Sharquie KE, Al-Obaidi HK. Onion juice (Allium cepa L.), a brand new  alopecia areata. J . 2002 Jun;29(6):343-6. PubMed PMID:12126069.

4-Oh JY, Park MA, Kim YC. Peppermint Oil Promotes Hair Progress with out Poisonous
Indicators. Toxicol Res. 2014 Dec;30(4):297-304.

5-Lee BH, Lee JS, Kim YC. Hair Progress-Selling Results of Lavender Oil in C57BL/6 Mice. Toxicol Res. 2016 Apr;32(2):103-8.





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