गेमिंग डिसऑर्डर के लक्षण, कारण, इलाज, दवा, उपचार, डॉक्टर, बचाव

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गेमिंग डिसऑर्डर के लक्षण – Gaming Dysfunction Signs in Hindi

गेमिंग डिसऑर्डर होने पर कई लक्षण दिख सकते हैं, जैसे – हमेशा गेम खेलने के बारे में सोचते रहना या लोगों को अपने गेम खेलने की आदत के बारे में झूठ बोलना, गेम न खेलने के कारण बुरा लगना इत्यादि. आइए, गेमिंग डिसऑर्डर के लक्षणों के बारे में विस्तार से जानते हैं –

ज्यादातर समय गेम में

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अगर कोई गेम के लिए जरूरत से ज्यादा समय निकाल रहा है या जब गेम नहीं खेल रहा है, तो सिर्फ गेम के बारे में ही सोच रहा है, तो ये गेमिंग डिसऑर्डर का अहम लक्षण हो सकता है.

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गेम न खेलने पर मूड खराब

यदि किसी को गेम खेलने का समय नहीं मिल रहा या किसी अन्य कारण से गेम नहीं खेल पा रहा है, तो मूड खराब हो सकता है. इससे वह व्यक्ति चिड़चिड़ा हो सकता है, गुस्सा करना शुरू कर सकता है या उदास हो सकता है. ये सभी गेमिंग डिसऑर्डर के लक्षण हैं.

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खुश होने को गेम खेलना

जब भी खुद को अच्छा महसूस करवाना हो, तो गेम खेलने बैठ जाना. अपनी सारी दिनभर की जरूरी एक्टिविटीज को भूलकर गेम खेलना, गेम खेलने के दौरान हर बार जरूरी काम करना भूल जाना भी गेमिंग डिसऑर्डर के लक्षण हैं.

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गेम बीच में न छोड़ना

अपने दिनभर के जरूरी काम निपटाने के लिए गेम को बीच में बंद न करना या गेम खेलते हुए टाइम का अहसास न होना, गेम के दौरान किसी भी तरह की रुकावट पसंद न करना, अपनी फेवरेट एक्टिविटीज छोड़कर सिर्फ एक ही गेम खेलने रहना या फिर चाहकर भी गेम बंद न कर पाना सभी गेमिंग डिसऑर्डर के लक्षण है. इसके अलावा, कितनी देर से गेम खेल रहे हैं या गेम खेलने की आदत के बारे में झूठ बोलना भी गेमिंग डिसऑर्डर ही है.

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काम पर ध्यान नहीं

गेमिंग हर वक्त दिमाग में रहने के कारण काम पर फोकस न कर पाना, गेमिंग के कारण होमवर्क कंप्लीट न कर पाना, स्टडी पर फोकस न करना या पढ़ने में समस्याएं होना, कोई भी काम करते हुए समस्या होना भी गेमिंग डिसऑर्डर है. साथ ही आपकी सोशल, फैमिली और निजी लाइफ प्रभावित होना. इन सभी समस्याओं के बावजूद गेम खेलते रहना गेमिंग डिसऑर्डर ही है.

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एक ही पैर्टन फॉलो करना

हर कोई जो बहुत ज्यादा गेम खेलता है, उसे गेमिंग डिसऑर्डर की समस्या नहीं होती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे लोगों को दोष देना खतरनाक हो सकता है, जो गेमिंग को लेकर बहुत एक्साइटेड होते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जिस व्यक्ति को गेमिंग डिसऑर्डर होता है, वो 12 महीने तक एक ही पैर्टन में व्यवहार करता है, जैसे – गेमिंग हैबिट पर अपना कंट्रोल खो देना, हमेशा गेमिंग को प्राथमिकता देना, नकारात्मक प्रभाव पड़ने पर भी गेमिंग खेलने के पैर्टन में कोई बदलाव न आना.

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